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Showing posts from July, 2021

राम कथा गंगा सी

 *गंगा के समान श्री राम कथा* हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण आपको मेरा बार-बार प्रणाम आपका दास मधु मंगल दास                 हरे कृष्ण _पूँछेहु रघुपति कथा प्रसंगा।_ _सकल लोक जग पावनि गंगा॥_  भगवान भोंले नाथ ने देवी पार्वती से कहा है गिरिराज कुमारी तुम धन्य हो तुमने श्री रघुनाथ की कथा का प्रसंग पूछा है जो जगत को पवित्र करने वाली गंगा के समान है। श्री राम की कथा भोंलेनाथ के द्वारा कही गई उमा जी द्वारा सुनी गई तथा हनुमान जी द्वारा तुलसी दास की रचना को अनुमोदित की गई। साधु संत महात्मा गुरुजनों द्वारा इसको लोक हित मे गाई जाती है। इस कथा का चिंतन किया जाता है। इस कथा के अनुमोदन करने, गाने सुनने और सुनाने से समस्त प्रकार के पाप नष्ट हो जाते है तथा बुद्धि में निर्मलता आती है, आत्म बल बढ़ता है और सुख शांति प्राप्त होती है।         गंगा जी के घाट पर जाने के बाद पाप धुलते हैं लेकिन इस कथा को जहा भी सुनो वहीं घाट बन जाता है, वहीं तीर्थ बन जाता है, वहीं ज्ञान रूपी गंगा प्रा...

हनुमान विशेष

 हनुमान विशेष 〰️〰️🌼〰️〰️ हनुमान जी के जीवन के ऐसे कई रोचक प्रसंग हैं, जिनसे जीवन में प्रेरणा मिलती है। आज इस लेख में हम जानते हैं ऐसी ही कुछ रोचक बातों के बारे में कि आखिर हनुमानजी सिंदूर क्यों पसंद करते हैं।  हनुमान जी की पूजा महिलाओं को क्यों नहीं करनी चाहिए। साथ ही ये भी जानेंगे कि नटखट नन्हें मारुति ने ऐसा क्या किया कि उनका नाम हनुमान रख दिया गया। श्री हनुमान क्यों हुए सिंदूरी शास्त्रों में इस विषय में जानकारी दी गई है कि जब रावण को मारकर राम जी सीता जी को लेकर अयोध्या आए थे। तब हनुमान जी ने भी भगवान राम और माता सीता के साथ आने की जिद की। राम ने उन्हें बहुत रोका। लेकिन हनुमान जी थे कि अपने जीवन को श्री राम की सेवा करके ही बिताना चाहते थे।      एक बार उन्होंनें माता सीता को मांग में सिंदूर भरते हुए देखा। तो माता सीता से इसका कारण पूछ लिया। माता सीता ने उनसे कहा कि वह प्रभु राम को प्रसन्न रखने के लिए सिंदूर लगाती हैं। हनुमान जी को श्री राम को प्रसन्न करने की ये युक्ति बहुत भा गई। उन्होंने सिंदूर का एक बड़ा बक्सा लिया और स्वयं के ऊपर उड़ेल लिया। और श्री राम के ...

देवशयनी_एकादशी

 देवशयनी_एकादशी_के_बाद_शुभ_कार्य_क्यों_नहीं_होते_हैं     इस वर्ष 20 जुलाई 2021 को हरिशयनी एकादशी आ रही है। देवशयनी एकादशी नाम से ही स्पष्ट है कि इस दिन श्रीहरि शयन करने चले जाते हैं। इस अवधि में श्रीहरि पाताल के राजा बलि के यहां चार मास निवास करते हैं।    देवशयनी एकादशी, पद्मा एकादशी, पद्मनाभा एकादशी के नाम से पुकारी जाने वाली इस एकादशी के दिन से ही गृहस्थ लोगों के लिए चातुर्मास नियम प्रारंभ हो जाते हैं। चातुर्मास असल में संन्यासियों द्वारा समाज को मार्गदर्शन करने का समय है। आम आदमी इन चार महीनों में अगर केवल सत्य ही बोले तो भी उसे अपने अंदर आध्यात्मिक प्रकाश नजर आएगा।    इन चार मासों में कोई भी मंगल कार्य- जैसे यज्ञोपवीत, शुभ मांगलिक विवाह, मुंडन, उपनयन संस्कार, नवीन गृह प्रवेश आदि नहीं किया जाता है। ऐसा क्यों?    तो इसके पीछे सिर्फ यही कारण है कि आप पूरी तरह से ईश्वर की भक्ति में डूबे रहें, सिर्फ ईश्वर की पूजा-अर्चना करें। बदलते मौसम में जब शरीर में रोगों का मुकाबला करने की क्षमता यानी प्रतिरोधक शक्ति बेहद कम होती है, तब आध्यात्मिक शक्...