भगवान के साकार व निराकार रूप!!!!!! भगवान अथार्त ब्रह्म परमात्मा परमेश्वर निराकार है या साकार है । इस पर हमेशा से ही भिन्न भिन्न विचार लोग रखते आये हैं व प्रायः विद्वान् जनो व भक्तों ने भी इस पर अपनी अपनी राय अपने अपने साधन व साधन की सफलता के अनुरूप दी है। यहाँ ये समझना आवश्यक है की ये प्रभु की महान कृपा की उसने सभी को जिसने उसे जिस भी रूप में देखा और राय दी उसे मंडित किया अपने प्रिय भक्तों के विचारों के अनुसार करूणानिधि व भक्तवत्सल प्रभु ने प्रायः सभी रूपों में अपने को प्रदर्शित किया । भगवान के लिए कुछ भी असंभव नहीं और वो तो वैसे भी सबकुछ है ही चाहे हम निराकार रूप को लें या साकार रूप को लें । परन्तु भगवान क्या साकार व निराकार के अतिरिक्त भी कुछ हो सकते हैं तो जहाँ तक इंसान सोच सकता है भगवान वहां तक हो सकते हैं चाहे वो सगुण साकार की बात हो या निर्गुण निराकार या फिर दोनों का मिश्रित रूप । प्राकृतिक मन बुद्धि इन्द्रियों के द्वारा भगवान की विवेचना नहीं हो सकती क्यूंकि परमात्मा चेतन है सबका प्रकाशक है व मन बुद्धि इन्द्रियाँ जड़ हैं वस्तुतः परमेश्वर के लिए ये कहना की वो साकार ही है अथवा...