"ब्रह्म राम तें नाम बड़" बर दायक बर दानि। रामचरित सत कोटि महँ लिय महेस जियँ जानि।। गोस्वामी जी स्पष्ट रूप से, बिना किसी संकोच के कहते हैं कि "ब्रह्म राम तें नाम बड़" अर्थात परमात्मा निर्गुण निराकार ब्रह्म से उनका नाम बड़ा है ही सगुण साकार रूप राम जी से भी बड़ा है। उदाहरण के लिए मनु सतरुपा जी ने "द्वादस अक्षर मंत्र बर जपहिं सहित अनुराग" नाम जाप कर निर्गुण निराकार ब्रह्म को चर्म चक्षुओं से दर्शन करने में सफल भी हुए और उन्हें पुत्र रुप में अवतरित होने को तैयार भी कर लिए । उनके द्वारा नाम के अवलंबन लेने पर उन्हें उसी प्रकार से उपस्थित होना पड़ा मानो जैसे कचहरी के मामूली चपरासी के पुकारने पर करोड़पति अभियुक्त भी , जो सैकड़ों लोगों के बीच में था, तत्काल उपस्थित हो जाता है। परम स्वतंत्र , जिनके सिर पर कोई नहीं है (परम स्वतंत्र न सिर पर कोई। देखउं नयन परम प्रभु सोई)। वे नाम के अवलंबन लेने वाले के सन्मुख आ गए अतः नाम में शक्ति है ही। शबरी माता ने कभी सगुण साकार श्रीराम जी को देखी नहीं थीं लेकिन सद्गुरु के वचनों पर विश्वास करते हुए श्रीराम नाम के अवलंबन ली तो...