जय माँ महाकाली आज हम आपको महाशक्ति के मुख्य रहस्यों से अवगत करवाएंगे हालांकि यह बहुत गूढ़ विषय है किंतु अध्ययन और मनन करने पर इसे समझा जा सकता है! महा-शक्ति का रहस्य विश्व में जो कुछ है, वह व्यापक ब्रह्म है।'तैत्तिरीयोपनिषद्' ने ब्रह्म की व्याख्या करते हुए कहा है कि जिसमें सारा विश्व पैदा होता है, पैदा होकर जीता है और जीकर जिसमें लय होता है, उसी का नाम ब्रह्म है।इस बात को समझाते हुए गुरुदेव ने पहले शिष्य को यह बताया कि 'अत्नं ब्रह्मेति व्यजानत' अर्थात् अन्न ब्रह्म है। देह अन्न से पैदा हुआ, अन्न से जीता है और अन्न में लय होता है। अतएव अन्न को ब्रह्म मानो। शिष्य को इस व्याख्या से संतोष न हुआ, तब गुरुजी ने 'प्राणं ब्रह्मेति व्यजानत' कहा अर्थात् प्राण ब्रह्म है। देह प्राण से पैदा हुआ, प्राण से जीता है और प्राण में लय होता है। शिष्य को इस व्याख्या से सन्तोष न हुआ। फिर गुरुजी न 'मन ब्रह्मेति व्याजानत' बताया अर्थात् मन ब्रह्म है। शिष्य को इस व्याख्या से सन्तोष न हुआ। तब गुरुजी ने 'विज्ञान' को...