✨ मानसी-सेवा का अद्भुत फल ✨ 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩 बहुत पुरानी बात है, वृन्दावन में एक सन्त रहते थे। . उनके पास बालकृष्ण की एक मूर्ति थी जिसे वह अपना पुत्र मानते थे और स्वयं को नंदबाबा समझकर श्रीकृष्ण की मानसिक सेवा किया करते थे। . श्रीकृष्ण का चरित्र ही इतना अद्भुत है कि उनसे आप अपना कोई भी नाता (पिता, पुत्र, स्वामी, पति, सखा, दास आदि) जो भी आपको अच्छा लगे, जोड़ सकते हैं... . तोहि मोहि नाते अनेक मानिये जो भावै। ज्यों-त्यों तुलसी कृपालु चरन-सरन पावै।। (विनय-पत्रिका ७९) . संत बाबा ब्राह्ममुहुर्त से लेकर रात्रि में शयन करने तक कन्हैया की मानसिक सेवा करते और मन से ही उन्हें सभी वस्तु अर्पण करते थे। . प्रात:काल ही लाला (व्रज में लड्डूगोपाल को लाला कहते हैं) को भूख लगी होगी-ऐसा सोचकर कन्हैया के लिए दूध, मलाई, मिश्री का मानसिक रूप से प्रबन्ध करते। . दोपहर में लाला से पूछते 'क्या खायेगा ?', वही तैयार करते। शाम को ब्यारु (रात्रि भोजन) कराते और रात को सोते समय दूध पिलाते। . गीता (९।२६) में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं.. . पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रय...