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भगवंत नाम महिमा

नाम मंत्र की महिमा।।
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श्रीकृष्ण: शरणं मम’ 
‘श्रीकृष्ण: शरणं मम’ 
‘श्रीकृष्ण: शरणं मम’
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श्रीकृष्ण: शरणं मम’ इस नाममन्त्र के संकीर्तन और जप से वैष्णवों को परम आनन्द और शान्ति का अनुभव होता है।’
महाप्रभु जी ‘अष्टाक्षरार्थ-निरूपण’ नामक ग्रन्थ में इस महामन्त्र की कैसी दिव्य महिमा कही गयी है:-
य: स्मरेत्तु सदा मन्त्रं ‘श्रीकृष्ण: शरणं मम’।
अष्टाक्षरं जपेन्नित्यं यमो दृष्ट्वा हि शंकते॥
“जो प्राणी सदैव ‘श्रीकृष्ण: शरणं मम’ इस प्रकार स्मरण करता है, जप-कीर्तनक रता है, उसको देखकर यम निश्चय शंकित होते हैं।”
जिस प्रकार भगवान मनुष्य की भावना के अनुसार उसके मनोरथ पूर्ण करने में समर्थ हैं, उसी प्रकार इस अष्टाक्षर महामन्त्र (जो कि भगवान का अक्षरात्मक भगवद्विग्रह है) का प्रत्येक अक्षर समस्त मनोरथों को पूर्ण करने में समर्थ है।
श्रीमद्भगवद्गीता के विभूतियोग में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है–‘यज्ञानां जपयज्ञोऽस्मि’ अर्थात् ‘समस्त यज्ञों में जपयज्ञ मैं हूँ’।
जप से सब प्रकार के क्लेशों की निवृत्ति होती है और समाधि सिद्ध होती है।
श्रीमद्वल्लभ मतानुयायी नाममन्त्र अथवा नामदीक्षा के रूप में ‘श्रीकृष्ण: शरणं मम’ इसी को जानते हैं।
इस महामन्त्र ‘श्रीकृष्ण: शरणं मम’ के प्रत्येक अक्षर की महिमा इस प्रकार है:-
श्री :- सौभाग्य देता है, धन और राजसुख देता है।
कृ :- यह पाप का शोषण करता है।
ष्ण: :- आधिभौतिक, आध्यात्मिक और आधिदैविक- तीनों प्रकार के दु:खों का हरण करता है।
श :- जन्म-मरण का दु:ख दूर करता है।
र :- प्रभु सम्बन्धी ज्ञान देता है।
णं :- प्रभु में दृढ़भक्ति कराता है।
म :- भगवत्-सेवा के उपदेशक गुरुदेव में प्रीति कराता है।
म :- प्रभु में सायुज्य कराता है, जन्म मरण के चक्र से मुक्ति दिलाता है।
‘श्रीकृष्ण: शरणं मम’ नाम मन्त्र की महिमा:-
इस मन्त्र के उच्चारण से सिद्धि सदैव घर में रहती है, समस्त प्रकार के आनन्दों की उपलब्धि होती है।
सारे विघ्न, बीमारियां, ग्रहपीड़ा दूर हो जाते हैं, साथ ही दुर्लभ भगवत्प्रेम की प्राप्ति होती है।
आक्रमण, अपमान-सहन आदि के निवारण का भी उत्तम साधन यह नाममन्त्र है।
इस प्रकार यह कलियुग का महामन्त्र है।
इस प्रकार कलिकाल में भवसागर से पार होने का यह सहज और सरल उपाय है।
श्रीमद्वल्लभाचार्यजी लिखते है:- ‘भगवान के स्वधाम पधार जाने पर उनके नाम का उच्चारण करने मात्र से ही जीव मुक्त हो जाता है–भव बंधन से छूट जाता है।’
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‘श्रीकृष्ण: शरणं मम’ 
‘श्रीकृष्ण: शरणं मम’ 
‘श्रीकृष्ण: शरणं मम’



ॐ नमः शिवाय

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