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विश्वास

विश्वास

दो कहानियां है जो हमारे विश्वास को दर्शाती हैं

1 . एक बार एक गांव में बरसात हो ,इसके लिये प्राथना सभा रखी जाती हैं।सभी गांव वासी प्रार्थना के लिये इकट्ठा हुये। एक बालक भी अपनी छतरी ले कर वहां पर आ गया। गांव वालो ने कहा भाई वैसे ही बरसात नही हो रही उस पर तुम छतरी लेकर आ गए? तुम छतरी का क्या करोगे? उस अबोध बालक ने  कहा प्रार्थना होगी तो बरसात होगी , तब मैं भीग नही जाऊंगा। 
इसे कहते है विश्वास।।
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दूसरी कथा।
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2- एक संत ने अपनी सभा मे कहा कि *"ऊपर वाला जब भी देता ,देता छप्पर फाड़कर के"।
एक श्रदालु अनुयायी ने सोचा कि यदि ऊपर बाला छप्पर फाड़ कर ही देगा तो क्यो ना मै उसका काम आसान कर दूं।औऱ उसने अपनी छत का एक हिस्सा तोड़ दिया।
   उस रात एक चोर चोरी करके छतों से भाग रहा था,वो टूटी छत से नीचे गिरने लगा,किसी तरह वो चोर तो छत से लटकर वहाँ से निकल भागा।पर उसका चोरी का सामान उसी घर मे गिर गया जो मकान मालिक को मिला।
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कहने का मतलब यह है कि यदि आपको अपने परमात्मा पर, अपने इष्ट पर पूर्ण विश्वास है तो ही आप सफल हो सकते हैं, तो पूरी कायनात आपको सफल करने लगेगी।
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मैंने मेरे एक कार्यक्रम के दौरान इन दोनों कथाओं को बताया तो वहां मौजूद कुछ विद्वान विद्वता के जुगाली करके यह साबित करने लगे कि वे नास्तिक हैं और ईश्वर पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं करते फिर वह क्यों जीवन जी ले रहे हैं? प्रश्न बहुत ही अच्छा था और धारा में बहने वाले कुछ लोग भी उनके साथ शामिल हो गए यह साबित करने के लिए की कथा जो सुनाई गई है वह गलत है। मेरे कहने का आशय यह है कि प्रारब्ध के संचित कर्मों का फल तो आपको भोगना पड़ेगा। यदि प्रारब्ध के संचित कर्म फल उत्तम प्रकृति के हैं तो तमाम विपरीत स्थितियों के बावजूद भी समय आपका साथ देगा लेकिन भगवत नाम के सुमिरन से और भगवत नाम के सुमिरन में विश्वास रखने से ईश्वर के सुरक्षा का एक कवच आपके चारों ओर तैयार हो जाता है और वह विश्वास की सुरक्षा का कवच तमाम प्रकार के संकट मुसीबत से व्यक्ति को निकाल कर बाहर ले आता है यह कहना नितांत सत्य है कि कर्म का जीवन में बहुत बड़ा स्थान है लेकिन यह कहना भी उतना बड़ा ही सत्य है कि ईश्वर की कृपा के बिना कर्म के फल भी उचित रूप से नहीं मिलते।
जय श्री राम
जय जय श्री राम
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डॉ राहुल श्रीवास्तव
९३०१३६०६१९

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