||श्री विष्णु||
ॐ विष्णुं विष्णुं महाविष्णुं प्रभविष्णुं महेश्वरम् |
अनेकरूपं दैत्यान्तं नमामि पुरुषोत्तमम् ||
सशङ्खचक्रं सकिरीटकुण्डलं
सपीतवस्त्रं सरसीरुहेक्षणम् |
सहारवक्षःस्थलकौस्तुभश्रयं
नमामि विष्णुं शिरसा चतुर्भुजम् ||
श्री विष्णु, श्री विष्णु, श्री विष्णु....
ॐ नमो नारायणाय !
वेदों और पुराणों भगवान विष्णु को श्रृष्टि का पालनहार कहा गया है। मानव जीवन से जुड़े सुख-दुख का चक्र श्री हरि के हाथों में है. भगवान की उपासना में विष्णु सहस्रनाम के पाठ का बहुत महत्व है। इस स्तोत्र में लक्ष्मीपति के एक हजार नाम दिए हैं. अगर आप रोज ये स्त्रोत्र नहीं पढ़ सकते तो जानें विष्णु के हजारों नाम का फल देने वाला मंत्र...
इस मंत्र से मिलेगा विष्णु सहस्रनाम स्त्रोत्र का लाभ:
'नमो स्तवन अनंताय सहस्त्र मूर्तये, सहस्त्रपादाक्षि शिरोरु बाहवे।
सहस्त्र नाम्ने पुरुषाय शाश्वते, सहस्त्रकोटि युग धारिणे नम:।।'
यह एक श्लोक है, जिस का सर उतना ही है, जितना कि विष्णु सहस्रनाम स्त्रोत्र का है। रोज सुबह इस एक मंत्र का जाप करने से जीवन में आने वाली कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है।
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