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महाभारत का रोचक प्रसंग

 महाभारत में युद्ध के बाद मृत्यु से पहले इन 4 योद्धाओं की थी सबसे कठिन अंतिम इच्छा


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महाभारत अनगिनत कहानियों से भरा हुआ है. जीवन को समझना है तो महाभारत के विभिन्न पात्रों से जुड़ी हुई घटनाओं को पढ़कर बहुत कुछ जाना जा सकता है. महाभारत में ऐसा ही प्रसंग है योद्धाओं की अंतिम इच्छा से जुड़ा हुआ. आइए, जानते हैं महाभारत के किन योद्धाओं ने अपनी कौन-कौन सी अंतिम इच्छा रखी थी|


घटोत्कच की अंतिम इच्छा

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जब श्रीकृष्ण ने भीमपुत्र घटोत्कच की अंतिम इच्छा के बारे में पूछा तो घटोत्कच ने विनम्रतापूर्वक कहा ‘हे प्रभु यदि मैं वीरगति को प्राप्त करूं, तो मेरे मरे हुए शरीर को ना भूमि को समर्पित करना, ना जल में प्रवाहित करना, ना अग्नि दाह करना मेरे इस तन के मांस, त्वचा, आँखे, ह्रदय आदि को वायु रूप में परिवर्तित करके आकाश में उड़ा देना. मेरे शरीर के कंकाल को पृथ्वी पर स्थापित कर देना. आने वाले समय में मेरा यह कंकाल महाभारत युद्ध का साक्षी बनेगा. श्रीकृष्ण ने घटोत्कच की मृत्यु के बाद उनकी अंतिम इच्छा पूरी की थी|


विदुर की अंतिम इच्छा

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युद्ध के समय जब विदुर श्रीकृष्ण से मिले और मन की गांठे खोलते हुए अपनी अंतिम इच्छा उन्हें बताई. उन्होंने कहा ‘प्रभु मैं धरती पर इनका प्रलयकारी युद्ध देखकर आत्मग्लानि महसूस कर रहा हूं. मेरी मृत्यु के पश्चात में अपने शव का एक अंश भी यहां छोड़ना नहीं चाहता, इसलिए आप मेरे शरीर को न दफनाएं या जलाए बल्कि शरीर को सुदर्शन चक्र में परिवर्तित कर दें. श्रीकृष्ण ने ऐसा ही किया|


संजय की अंतिम इच्छा

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हिमालय पर संजय ने भगवान कृष्ण का कठिन तप किया. तप से प्रसन्न होकर कृष्ण भगवान प्रकट हुए और संजय से बोले- ये संजय! तुम्हारी तपस्या से मैं बहुत खुश हूंं. आज जो चाहे वो मुझसे मांंग लो. संजय ने श्रीकृष्ण से कहा – ‘प्रभु महाभारत युद्ध मेंं मैंंने अधर्म का साथ दिया है. इसलिए आप मुझे पत्थर बना दो और जब तक आपका फिर से धरती पर अवतार ना हो तब तक इसी हिमालय पर पत्थर रूप में आप की भक्ति करता रहूँं. भगवान श्रीकृष्ण ने संजय को अपने शालग्राम रूप में परिवर्तित करके हिमालय पर स्थापित कर दिया|


कर्ण की अंतिम इच्छा

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जब कर्ण मृत्युशैय्या पर थे, तो उन्होंने श्रीकृष्ण को अपनी अंतिम इच्छा बताई थी. कर्ण ने यह मांगा कि अगले जन्म में कृष्ण उन्हीं के राज्य में जन्म लें और दूसरी इच्छा में उन्होंने कृष्ण से कहा कि उनका अंतिम संस्कार ऐसे स्थान पर होना चाहिए जहां कोई पाप ना हो. भगवान श्रीकृष्ण ने इस प्रकार योद्धाओं की अंंतिम इच्छा को पूरा किया

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