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वासुदेवाय नमः।

 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।


❤️जगत गुरु श्रीकृष्णचन्द्र जो सबके प्रियतम प्राण।

अगहन (मार्गशीर्ष) की एकादशी को प्रगटे गीता-ज्ञान॥


💕विश्व के किसी भी धर्म या संप्रदाय में किसी भी ग्रंथ की जयंती नहीं मनाई जाती।

सनातन हिंदू धर्म में भी सिर्फ गीता जयंती मनाने की परंपरा पुरातन काल से चली आ रही है, क्योंकि अन्य ग्रंथ किसी मनुष्य द्वारा लिखे या संकलित किए गए हैं जबकि गीता का जन्म स्वयं श्रीभगवान के श्रीमुख से हुआ है:-


💖"या स्वयं पद्मनाभस्य मुखपद्माद्विनि:सृता"

🍁श्री गीता जी" का प्राकट्य धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में मार्गशीर्ष मास में शुक्लपक्ष की एकादशी को भगवान श्रीकृष्ण के मुख से हुआ था, यह तिथि मोक्षदा एकादशी के नाम से विख्यात है।


🌻कलियुग के प्रारंभ होने के मात्र तीस वर्ष पहले, मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी के दिन, कुरुक्षेत्र के मैदान में, अर्जुन के नन्दिघोष नामक रथ पर सारथी के स्थान पर बैठकर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश किया था, इसी तिथि को प्रतिवर्ष गीता जयंती का पर्व मनाया जाता है।


❤️गीता एक सार्वभौम ग्रंथ है, यह किसी काल, धर्म, संप्रदाय या जाति विशेष के लिए नहीं अपितु संपूर्ण मानव जाति के लिए हैं।


🌿इसे स्वयं श्रीभगवान ने अर्जुन को निमित्त बनाकर कहा है, इसलिए इस ग्रंथ में कहीं भी श्रीकृष्ण उवाच शब्द नहीं आया है बल्कि श्रीभगवानुवाच का प्रयोग किया गया है।


💐इसके छोटे-छोटे अठारह अध्यायों में इतना सत्य, ज्ञान व गंभीर उपदेश भरे हैं जो मनुष्यमात्र को नीची से नीची दशा से उठाकर देवताओं के स्थान पर बैठाने की शक्ति रखते हैं।


भगवद्‍ गीता के पठन-पाठन श्रवण एवं मनन-चिंतन से जीवन में श्रेष्ठता के भाव आते हैं। 


गीता केवल लाल कपड़े में बाँधकर घर में रखने के लिए नहीं बल्कि उसे पढ़कर संदेशों को आत्मसात करने के लिए है।


गीता का चिंतन अज्ञानता के आचरण को हटाकर आत्मज्ञान की ओर प्रवृत्त करता है।


गीता भगवान की श्वास और भक्तों का विश्वास है, गीता भक्तों के प्रति भगवान द्वारा प्रेम में गाया हुआ गीत है।


मंगलमय जीवन का ग्रंथ है गीता, गीता केवल ग्रंथ नहीं, कलियुग के पापों का क्षय करने का अद्भुत और अनुपम माध्यम है।


जिसके जीवन में गीता का ज्ञान नहीं वह पशु से भी बदतर होता है।


गीता मंगलमय जीवन का ग्रंथ है, गीता केवल धर्म ग्रंथ ही नहीं यह एक अनुपम जीवन ग्रंथ है।


जीवन उत्थान के लिए इसका स्वाध्याय हर व्यक्ति को करना चाहिए।

गीता एक दिव्य ग्रंथ है, यह हमें पलायन से पुरुषार्थ की ओर अग्रस होने की प्रेरणा देती है।

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