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श्री हरिविष्णु

 विष्णु भगवान पूरी सृष्टि के पालनहार है। जब जब धरती पर पाप बढ़ता है। तो पाप का नाश करने के लिए श्री हरि विष्णु धरती पर प्रकट होते है। और राक्षसों का वध करके सृष्टि के बोझ को हल्का करते है। कभी वह श्री राम के अवतार में तो कभी श्री कृष्ण के अवतार में भगवान ने भक्तों के कष्ट दूर किए। सर्वव्यापक परमात्मा ही भगवान विष्णु हैं। पूरे संसार को चलाने वाले भगवान विष्णु हैं।


वह निर्गुण और सगुण है।जो पीताम्बरधारी, वनमाला, सुंदर कमलों के समान नेत्र वाले भगवान श्री विष्णु का ध्यान करता है, वह बंधनों से मुक्त हो जाता है। वह ही नारायण हैं, वासुदेव, अच्युत, परमात्मा, माधव, कृष्ण, शाश्वत, शिव, अनेक नामों से पुकारे जाते हैं। वहीं हरि श्री विष्णु की स्तुति का पाठ करने से श्री नारायण भगवान प्रसन्न होते हैं, और साधक की सभी मनोकामनाओं को पूरा करते है।

      🌹👏श्री हरि स्तुति👏🌹

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशहम्। विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभांगम्।।


लक्ष्मीकातं कमलनयनं योगिभिध्र्यानगम्यं। वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।।


जय जय सुरनायक जन सुखदायक प्रनतपाल भगवंता।


गो द्विज हितकारी जय असुरारी सिधुंसुता प्रिय कंता।।


पालन सुर धरनी अद्भुत करनी मरम न जानइ कोई।


जो सहज कृपाला दीनदयाला करउ अनुग्रह सोई।।


जय जय अबिनासी सब घट बासी ब्यापक परमानंदा।


अबिगत गोतीतं चरित पुनीतं मायारहित मुकुंदा।।


जेहि लागि बिरागी अति अनुरागी बिगतमोह मुनिबृंदा।


निसि बासर ध्यावहिं गुन गन गावहिं जयति सच्चिदानंदा।।


जेहिं सृष्टि उपाई त्रिबिध बनाई संग सहाय न दूजा।


सो करउ अघारी चिंत हमारी जानिअ भगति न पूजा।।


जो भव भय भंजन मुनि मन रंजन गंजन बिपति बरूथा।


मन बच क्रम बानी छाड़ि सयानी सरन सकल सुर जूथा।।


सारद श्रुति सेषा रिषय असेषा जा कहुँ कोउ नहि जाना।


जेहि दीन पिआरे बेद पुकारे द्रवउ सो श्रीभगवाना।।


भव बारिधि मंदर सब बिधि सुंदर गुनमंदिर सुखपुंजा।


मुनि सिद्ध सकल सुर परम भयातुर नमत नाथ पद कंजा।।

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