श्रीरामचरितमानस, राम जी के दर्शन, साधना और आराधना...?
श्री रामचरितमानस का पाठ सभी कामनाओं की पूर्ति के साथ ही संकट एवं रोग निवारक और आयुवर्धक भी हैं। श्रीरामचरित मानस की चौपाइयां केवल शब्द नहीं हैं, इससे जीवन में कई प्रकार की बड़ी से बड़ी समस्याओं का अंत हो जाता है। वैसे तो इसकी प्रत्येक चौपाई, दोहा, छंद या श्लोक सर्व-सिद्ध मंत्र हैं; परंतु कुछ विशेष मंत्र यहाँ प्रस्तुत हैं।
श्रीसुंदर काण्ड में प्रसंग आया है "मोहि कपट छल छिद्र न भावा"। अतः क्षल कपट से विहीन शुद्ध सात्विक हृदय से श्री राम को हृदय में रखें, वे रहेंगे ही। ऐसा दृढ़ विश्वास जरूरी है, उनकी कृपा निश्चय ही बरसेगी। श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई साधना में अंतिम दिन भगवान श्री राम के बिम्बात्मक दर्शन होते ही हैं और यह यथार्थ सत्य है। बस जरूरत है तो श्रृद्धा और विश्वास की।
श्री राम जी की आराधना---
"श्री रामचरितमानस मंत्र"
१.मंत्रः- "त्रिविध दोष दुःख दारिद दावन। कलि कुचालि कलि कलुष नसावन॥"
(त्रिबिधि दुःख नाश हो जाते हैं)।
२.मंत्रः- "दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहिं व्यापा॥"
(रोग नष्ट हो जाते हैं) ।
३.मंत्रः- "आपदाम पहर्तारं दातारं सर्व सम्पदाम्। लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्॥" "जे सकाम नर सुनहि जे गावहि! सुख संपत्ति नाना विधि पावहि!!"
(सर्व सम्पत्ति की प्राप्ति होती है)।
४.मंत्र:- " कवन सो काज कठिन जग माही! जो नहीं होइ तात तुम पाहीं!! "
(कठिन कार्य सरलता से बन जाते हैं) ।
५.मंत्र:- "जेहि पर कृपा करहि जनु जानी! कवि उर अजिर नचावहि बानी!! मोरि सुधारिहि सो सब भांति! जासु कृपा नहि कृपा अघाति!!"
(परीक्षा में सफलता, अच्छे अंकों की प्राप्ति होती है) ।
६.मंत्र:- "जिमि सरिता सागर मंहु जाही! जद्यपि ताहि कामना नाहीं!! तिमि सुख संपत्ति बिनहि बोलाएं! धर्मशील पहिं जहि सुभाएं!!"
(रोजगार प्राप्त होता है)।
७.मंत्र:- "तब जन पाई बसिष्ठ आयसु ब्याह! साज सँवारि कै! मांडवी, श्रुतकी, रति, उर्मिला कुँअरि लई हंकारि कै!!"
(विवाह सम्बंधित समस्या का निदान होता है) ।
८.मंत्र:- "हनुमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रणाम! राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहां विश्राम!!"
(आलस्य व अन्य विकारों से मुक्ति मिलती है)।
९.मंत्र:- "साधक नाम जपहिं लय लाएं! होहि सिद्धि अनिमादिक पाएं!!"
(रिद्धि सिद्धि प्राप्त होती है)।
१०. मंत्र:- (श्री सीताराम के दर्शन के लिये)
“नील सरोरुह नील मनि नील नीलधर श्याम । लाजहि तन सोभा निरखि कोटि कोटि सत काम ॥”
११.मंत्र:- (श्रीजानकीजी के दर्शन के लिये)।
“जनकसुता जगजननि जानकी। अतिसय प्रिय करुनानिधान की।।”
१२.मंत्र:- (सहज स्वरुप दर्शन के लिये)
“भगत बछल प्रभु कृपा निधाना। बिस्वबास प्रगटे भगवाना।।”
१३.मंत्र:- (श्रीरामचन्द्रजी को वश में करने के लिये)
“केहरि कटि पट पीतधर सुषमा सील निधान। देखि भानुकुल भूषनहि बिसरा सखिन्ह अपान।।”
१४.मंत्र:- (मोक्ष-प्राप्ति के लिये)
“सत्यसंध छाँड़े सर लच्छा। काल सर्प जनु चले सपच्छा।।”
१५.मंत्र:- (संशय-निवृत्ति के लिये)
“राम कथा सुंदर करतारी। संसय बिहग उड़ावनिहारी।।”
१६.मंत्र:- (ज्ञान-प्राप्ति के लिये)
“छिति जल पावक गगन समीरा। पंच रचित अति अधम सरीरा।।”
१७.मंत्र:- (भक्ति की प्राप्ति के लिये)
“भगत कल्पतरु प्रनत हित कृपासिंधु सुखधाम। सोइ निज भगति मोहि प्रभु देहु दया करि राम।।”
१८.मंत्र:- (विरक्ति के लिये)
“भरत चरित करि नेमु तुलसी जे सादर सुनहिं। सीय राम पद प्रेमु अवसि होइ भव रस बिरति।।”
१९.मंत्र:- (विचार शुद्ध करने के लिये)।
“ताके जुग पद से मनाउँ। जासु कृपाँ निरमल मति पावउँ।।”
२०.मंत्र:- (कातर की रक्षा के लिये)
“मोरें हित हरि सम नहिं कोऊ। एहिं अवसर सहाय सोइ होऊ।।”
२१.मंत्र:- (ईश्वर से अपराध क्षमा कराने के लिये)
” अनुचित बहुत कहेउँ अग्याता। छमहु छमा मंदिर दोउ भ्राता।।”
२२.मंत्र:- (परस्पर प्रेम बढाने के लिये)
"सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती॥"
२३.मंत्र:-( यात्रा सफ़ल होने के लिये )
“प्रबिसि नगर कीजै सब काजा। ह्रदयँ राखि कोसलपुर राजा॥”
२४.मंत्र:- (भगवत्स्मरण करते हुए आरामदायक मृत्यु के लिये)
"रामचरन दृढ प्रीति करि बालि कीन्ह तनु त्याग । सुमन माल जिमि कंठ तें गिरत न जानइ नाग ॥"
२५.मंत्र:- (विपत्ति-नाश के लिये)
“राजिव नयन धरें धनु सायक। भगत बिपति भंजन सुखदायक।।”
२६.मंत्र:- (संकट-नाश के लिये)
“जौं प्रभु दीन दयालु कहावा। आरति हरन बेद जसु गावा।। जपहिं नामु जन आरत भारी। मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी।। दीन दयाल बिरिदु संभारी। हरहु नाथ मम संकट भारी।।”
२७.मंत्र:- (कठिन क्लेश नाश के लिये)
“हरन कठिन कलि कलुष कलेसू। महामोह निसि दलन दिनेसू॥”
२८.मंत्र:- (विघ्न शांति के लिये)
“सकल विघ्न व्यापहिं नहिं तेही। राम सुकृपाँ बिलोकहिं जेही॥”
२९.मंत्र:- (खेद नाश के लिये)
“जब तें राम ब्याहि घर आए। नित नव मंगल मोद बधाए॥”
३०.मंत्र:- (चिन्ता की समाप्ति के लिये)
“जय रघुवंश बनज बन भानू। गहन दनुज कुल दहन कृशानू॥”
३१.मंत्र:-( विविध रोगों तथा उपद्रवों की शान्ति के लिये)
“दैहिक दैविक भौतिक तापा।राम राज काहूहिं नहि ब्यापा॥”
३२.मंत्र:- (मस्तिष्क की पीड़ा दूर करने के लिये)
“हनूमान अंगद रन गाजे। हाँक सुनत रजनीचर भाजे।।”
३३.मंत्र:- (विष नाश के लिये)
“नाम प्रभाउ जान सिव नीको। कालकूट फलु दीन्ह अमी को।।”
३४.मंत्र:- (अकाल मृत्यु निवारण के लिये)
“नाम पाहरु दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट। लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहि बाट।।”
३५.मंत्र:- (सभी तरह की आपत्ति के विनाश के लिये / भूत भगाने के लिये)
“प्रनवउँ पवन कुमार,खल बन पावक ग्यान घन। जासु ह्रदयँ आगार, बसहिं राम सर चाप धर॥”
३६.मंत्र:- (नजर उतारने के लिये)
“स्याम गौर सुंदर दोउ जोरी। निरखहिं छबि जननीं तृन तोरी।।”
३७.मंत्र:- (खोयी हुई वस्तु पुनः प्राप्त करने के लिए)
“गई बहोर गरीब नेवाजू। सरल सबल साहिब रघुराजू।।”
३८.मंत्र:- (जीविका प्राप्ति केलिये)
“बिस्व भरण पोषन कर जोई। ताकर नाम भरत जस होई।।”
३९.मंत्र:- (दरिद्रता मिटाने के लिये)
“अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के। कामद धन दारिद दवारि के।।”
४०.मंत्र:- (लक्ष्मी प्राप्ति के लिये) “जिमि सरिता सागर महुँ जाही। जद्यपि ताहि कामना नाहीं।। तिमि सुख संपति बिनहिं बोलाएँ। धरमसील पहिं जाहिं सुभाएँ।।”
४१.मंत्र:- (पुत्र प्राप्ति के लिये)
“प्रेम मगन कौसल्या निसिदिन जात न जान। सुत सनेह बस माता बालचरित कर गान।।’
४२.मंत्र:- (सम्पत्ति की प्राप्ति के लिये)
“जे सकाम नर सुनहि जे गावहि।सुख संपत्ति नाना विधि पावहि।।”
४३.मंत्र:- (ऋद्धि-सिद्धि प्राप्त करने के लिये)
“साधक नाम जपहिं लय लाएँ। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएँ।।”
४४.मंत्र:- (सर्व-सुख-प्राप्ति के लिये)
सुनहिं बिमुक्त बिरत अरु बिषई। लहहिं भगति गति संपति नई।।
४५.मंत्र:- (मनोरथ-सिद्धि के लिये)
“भव भेषज रघुनाथ जसु सुनहिं जे नर अरु नारि। तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहिं त्रिसिरारि।।”
४६.मंत्र:- (वार्तालाप में सफ़लता के लिये)
“तेहि अवसर सुनि सिव धनु भंगा। आयउ भृगुकुल कमल पतंगा॥”
४७.मंत्र:-( कुशल-क्षेम के लिये)
“भुवन चारिदस भरा उछाहू। जनकसुता रघुबीर बिआहू।।”
४८.मंत्र:- (मुकदमा जीतने के लिये)
“पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना।।”
४९.मंत्र:- (शत्रु के सामने जाने के लिये)
“कर सारंग साजि कटि भाथा। अरिदल दलन चले रघुनाथा॥”
५०.मंत्र:-( शत्रु को मित्र बनाने के लिये)
“गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई।।”
५१.मंत्र:- (शत्रुतानाश के लिये)
“बयरु न कर काहू सन कोई। राम प्रताप विषमता खोई॥”
५२.मंत्र:- (यात्रा सफ़ल होने के लिये)
“प्रबिसि नगर कीजै सब काजा। ह्रदयँ राखि कोसलपुर राजा॥”
५३.मंत्र:- (परीक्षा / शिक्षा की सफ़लता के लिये)
“जेहि पर कृपा करहिं जनु जानी। कबि उर अजिर नचावहिं बानी॥ मोरि सुधारिहि सो सब भाँती। जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती॥”
५४.मंत्र:- (आकर्षण के लिये)
“जेहि कें जेहि पर सत्य सनेहू। सो तेहि मिलइ न कछु संदेहू॥”
५५.मंत्र:-( स्नान से पुण्य-लाभ के लिये)
“सुनि समुझहिं जन मुदित मन मज्जहिं अति अनुराग। लहहिं चारि फल अछत तनु साधु समाज प्रयाग।।”
५६.मंत्र:- (निन्दा की निवृत्ति के लिये)
“राम कृपाँ अवरेब सुधारी। बिबुध धारि भइ गुनद गोहारी।।
५७.मंत्र:-( विद्या प्राप्ति के लिये)
गुरु गृहँ गए पढ़न रघुराई। अलप काल विद्या सब आई॥
५८.मंत्र:- (उत्सव मनाने के लिये)
“सिय रघुबीर बिबाहु जे सप्रेम गावहिं सुनहिं। तिन्ह कहुँ सदा उछाहु मंगलायतन राम जसु।।”
५९.मंत्र:- (यज्ञोपवीत धारण करके उसे सुरक्षित रखने के लिये)
“जुगुति बेधि पुनि पोहिअहिं रामचरित बर ताग। पहिरहिं सज्जन बिमल उर सोभा अति अनुराग।।”
६०.मंत्र:- (प्रेम बढाने के लिये)
सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती॥
६१.मंत्र:- (कातर की रक्षा के लिये)
“मोरें हित हरि सम नहिं कोऊ। एहिं अवसर सहाय सोइ होऊ।।”
६२.मंत्र:- (श्रीहनुमान् जी को प्रसन्न करने के लिये)
“सुमिरि पवनसुत पावन नामू। अपनें बस करि राखे रामू।।”
६३) श्री राम दर्शन साधना
"रां रामाय दर्शयामि नमः!"
#साधना नियम- *मंत्र की ५१ माला ११ दिन तक !
*यह जाप तुलसी की माला से हो !
*दिशा उत्तर या पूर्व हो !
* सफ़ेद सूती वस्त्र तथा आसान का प्रयोग करे !
* साधना काल में अन्य कोई व्यक्ति प्रवेश न करे !
* हनुमानजी का भी यथा योग्य ध्यान जाप पूजन उत्तम !
* भूमिशयन, ब्रम्हचर्य का पालन, संभव हो उतना मौन तथा एक समय सात्विक भोजन का पालन !
* साधना किसी भी शुभ दिन से शुरू की जा सकती है !
* समय रात्रि में १० बजे के बाद ! * साधक राम चिंतन मे ही लीन रहे ! --- इस मंत्र से श्री राम के दर्शन सर्वथा संभव हैं, कृपा बरसेगी ही !
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साभार संकलित
श्रीराम चरित मानस।
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