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सनातन संस्कृति

 *भोजन करने के 55जरुरी नियम 


 संकलित--श्रीरमेशानन्द गुरूजी


🌹🙏जय श्री महाकाल


★ हमारे पुराने ग्रंथों में पहले से ही भोजन के बारे में तथ्य दिया जा रहा है कि भोजन आधा पेट करना चाहिए, चौथाई पेट पानी पीना चाहिए और पेट की बाकी बची हुई जगह हवा के लिए रखनी चाहिए। लेकिन बहुत ही कम संख्या में लोग इस बात पर गौर करते हैं।


★ बहुत से लोगों का मानना ​​है कि कम भोजन करने से शरीर को पूरा पोषण नहीं मिल पाता है जिससे शरीर कमजोर हो जाता है। यह बात बिल्कुल गलत है। शरीर के लिए वही भोजन उपयोगी होता है जो शरीर में अच्छी तरह से पच जाए।


★ यह बात आपको हमेशा ध्यान रखनी चाहिए कि आप जितना अधिक भोजन करेंगे उतने ही अधिक रोग शरीर को घेरेंगे। आप अपने ऊपर इसका प्रयोग करके देख सकते हैं। 3-4 दिनों तक कम मात्रा में भोजन करने से आपको भूखे पेट होने का अहसास होगा। लेकिन एक सप्ताह बाद पेट उसी के अनुकूल हो जाएगा। इसके बाद ध्यान से अपने शरीर और व्यवहार को देखें। आप देखते हैं कि आपके शरीर में चेतना अधिक होती है। फिर अपने कम खाने के महत्व को समझनेकर आप अपने जीवन में इसका उपयोग करते रहेंगे।


★ जिन लोगों की उम्र संसार में बहुत ज्यादा है वह लोग हमेशा कम भोजन ही खाते हैं।


<> पत्तल में भोजन करने के लिए अदभुत लाभ है |


स्वस्थ निरोगी शरीर के लिए कैसे करें भोजन;--

भोजन सम्बन्धी कुछ नियम ...


१ - पांच अंगो ( दो हाथ , २ पैर , मुख ) को अच्छी तरह से धो कर ही भोजन करे !


२. गीले पैरों खाने से आयु में वृद्धि होती है !


३. प्रातः और सायं ही भोजन का विधान है !


४. पूर्व और उत्तर दिशा की ओर मुह करके ही खाना चाहिए !


५. दक्षिण दिशा की ओर किया हुआ भोजन मृत्यु (प्रेत) को प्राप्त होता है !


६ . पश्चिम दिशा की ओर किया हुआ भोजन खाने से रोग की वृद्धि होती है !


७. शैय्या पर , हाथ पर रख कर , टूटे फूटे वर्तनो में भोजन नहीं करना चाहिए !


८. मल मूत्र का वेग होने पर , कलह के माहौल में , अधिक शोर में , पीपल ,वट वृक्ष के नीचे , भोजन नहीं करना चाहिए !


९ परोसे हुए भोजन की कभी निंदा नहीं करनी चाहिए !


१०. खाने से पूर्व अन्न देवता , अन्नपूर्णा माता की स्तुति कर के ,उनका धन्यवाद देते हुए , तथा सभी भूखो को भोजन प्राप्त हो इस्वर से ऐसी प्रार्थना करके भोजन करना चाहिए !


११. भोजन बनने वाला स्नान करके ही शुद्ध मन से , वैदिक मंत्र जप करते हुए ही रसोई में भोजन बनाये और सबसे पहले ३ रोटिया अलग निकाल कर ( गाय , कुत्ता , और कौवे हेतु ) फिर अग्नि देव(यज्ञ) का भोग लगा कर ही घरवालो को खिलाये !


१२. इर्षा , भय , क्रोध , लोभ , रोग , दीन भाव , द्वेष भाव , के साथ किया हुआ भोजन कभी पचता नहीं है !


१३. आधा खाया हुआ फल , मिठाईया आदि पुनः नहीं खानी चाहिए ! 


१४. खाना छोड़ कर उठ जाने पर दुबारा भोजन नहीं करना चाहिए !


१५. भोजन के समय मौन रहे !


१६. भोजन को बहुत चबा चबा कर खाए !

१७. रात्री में भरपेट न खाए !


१८. गृहस्थ को ३२ ग्रास से ज्यादा न खाना चाहिए !


१९. सबसे पहले मीठा , फिर नमकीन ,अंत में कडुवा खाना चाहिए !


२०. सबसे पहले रस दार , बीच में गरिस्थ , अंत में द्राव्य पदार्थ ग्रहण करे ! 


२१. थोडा खाने वाले को --आरोग्य ,आयु , बल , सुख, सुन्दर संतान , और सौंदर्य प्राप्त होता है !


२२. जिसने ढिढोरा पीट कर खिलाया हो वहा कभी न खाए !


२३. कुत्ते का छुवा ,रजस्वला स्त्री का परोसा , श्राध का निकाला , बासी , मुह से फूक मरकर ठंडा किया , बाल गिरा हुवा भोजन ,अनादर युक्त , अवहेलना पूर्ण परोसा गया भोजन कभी न करे !


२४. कंजूस का , राजा का , वेश्या के हाथ का , शराब बेचने वाले का दिया भोजन कभी नहीं करना चाहिए !

25• भूख अच्छी तरह लगने के बाद ही खाना खाये। 

26• भोजन के समान भोजन को जितने से भूख शांत होनी चाहिए। 

27• भोजन के पहले निवाले को अच्छी तरह चबाने के बाद ही दूसरा निवाला लें। 

28• भोजन में कई तरह के खाद्य पदार्थ न के बारे में कम और सादा भोजन करना चाहिए ताकि पाचन क्रिया पर बेकार का बोझ न पड़े। 

29 • भोजन ध्यान लगाकर और शांति के साथ करना चाहिए। 

30 • रात के समय सोने से तीन घंटे पहले भोजन करना चाहिए। 

31• दुबारा भोजन करने के बीच में कम से कम 5 से 6 घंटे का फासला होना चाहिए। 

32• सोने के बाद उठकर तुरंत ही खाना नहीं खाना चाहिए। 

33• चिंता, शोक, थकान और जल्दबाजी में खाना नहीं खाना चाहिए। 

34• भोजन करते समय व्यापार, समाज आदि से जुड़ी समस्याओं पर बात नहीं करनी चाहिए। 

35 • भोजन में मिर्च-मसाले जैसे तेज पदार्थों का उपयोग नहीं करना चाहिए।

36• गले में जलन और गंदी वायु बनने पर भोजन न करें। 

36• बिना पचने वाला और वजनदार भोजन भूलकर भी न करें। 

37• जहाँ तक संभव हो सके अधपका भोजन ही करना चाहिए (फल और सलाद अंकुरित आदि)। 

38• बासी भोजन करने से कई तरह के रोग हो जाते हैं। 

39 • भोजन करते समय बीच-बीच में पानी न पिए या तो भोजन से 30 मिनट पहले पानी पिए या भोजन के 40 से 60 मिनट बाद पानी पिए। 

40• मैदा, सफेद चीनी, स्वाद किया हुआ चावल आदि पदार्थों के सेवन से दूध। 

41• भोजन में नमक, मिठाइयां, मसाले, घी आदि की मात्रा में कमी। 

42• चाय, कॉफी, तली हुई चीज Sm, शराब, और खाने के तंबाकू आदि के सेवन से नुकसान। 

43 • सप्ताह में एक दिन का रस और पानी पीकर रहना चाहिए। 

44 • चोकर सहित आटे की रोटी खायें। 

45• फल और सतर्कता धोकर प्रयोग करें।

46• भोजन करने से पहले और बाद में हाथ धोके कुल्ला करें और भोजन करने के बाद दान्त अच्छी तरह से साफ करें। 

47• खाना खाते समय बातें नहीं करनी चाहिए। 

48• भोजन करते समय स्क्रीनशॉट या टेलीविजन नहीं देखना चाहिए। 

49• भोजन करने के बाद मूत्र त्यागने की आदत डालनी चाहिए। 

50 • दूध हमेशा सुबह के समय पीना चाहिए। 

51 • बहुत अधिक गर्म व बहुत अधिक ठंड़ी वस्तुओं को खाने से हमारी पाचन क्रिया पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। 

52• भोजन के बाद मट्ठा पीना बहुत ही लाभदायक होता है। 

30 • एक बार खाने के बाद दूसरे बार खाने से पहले शरीर स्वस्थ न रहा तो दूसरा बार का खाना नहीं लेना चाहिए। 

53• दूध के मुकाबले दही से आसानी से पचता है। 

54 • भोजन करने के बाद 3 घंटे तक पति पत्नी को संसार व्यवहार नहीं करना चाहिए।

55• मूत्र त्यागने के बाद 10 मिनट तक खाना या पीना सेहत के लिए हानिकारक होता है।

🙏🌹ओ३म🌹🙏🌹

जय हो सत्य सनातन पवित्र वैदिक वसुंधरा की।

जय जय आर्यवर्त भरतखण्ड संस्कृति।*

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