〰️〰️〰️🪴🍁🪴〰️〰️〰️
*🌴//०८ मई २०२१ शनिवार //🌴*
*🍁वैशाखकृष्णपक्षद्वादशी२०७८🍁*
〰️〰️〰️🪴🍁🪴〰️〰️〰️
➖➖➖➖➖➖➖➖➖
*‼️ऋषि चिंतन‼️*
➖➖➖➖➖➖➖➖➖
〰️〰️〰️🌻🌼🌻〰️〰️〰️
*॥हम निकृष्ट स्तर का जीवन न जिएँ॥*
〰️〰️〰️🌻🌼🌻〰️〰️〰️
👉 बहुधा लोग सुखोपभोग के लिए धन की तृष्णा से प्रताड़ित रहा करते हैं । वे सोचा करते हैं कि *"अधिक से अधिक धन की सिद्धि होनी चाहिए, उसके लिए भले ही कितने निकृष्ट साधन प्रयोग क्यों न करने पड़ें, चिंता नहीं ।"* आज के समय में बहुत से लोग ऐसा कर भी रहे हैं, किंतु यदि गहरी और पैनी दृष्टि से देखा जाए तो पता चलेगा कि उस निकृष्ट धन से वे जिस सुख का उपभोग करते दिखाई देते हैं, *"वह वास्तव में उनके दुःख का कारण बना होता है ।"*
👉 उस वैभव और विभूति के बीच भी वे बड़े ही अशांत, भीत और असंतुष्ट रहा करते हैं । धन के साथ वे जिन महापापों का संचय अपने अंतःकरण में कर लिया करते हैं, *"वे शोक-संतापों के रूप में प्रकट होकर उनका सुख-चैन छीनते रहते हैं ।"*
👉 *"वैभव के बीच अशांत, असंतुष्ट और दुःखी रहने की अपेक्षा कहीं अच्छा है कि उत्कृष्टता की रक्षा करते हुए कठिन और अभावपूर्ण जीवन अंगीकार कर लिया जाए ।"* मनुष्य की भलाई इसी में है कि वह *"उत्कृष्टता"* में अपना गौरव समझे और अल्प साधनों में भी संतोषपूर्वक अपनी आवश्यकताएँ पूरी करता चले, *"किंतु भूलकर भी "निकृष्टता" की ओर न जाए ।"* उस अभावपूर्ण *"उत्कृष्ट"* जीवन में जो आत्मिक सुख, स्वर्गीय शांति और आत्म-गौरव प्राप्त होगा *"वह वैभवपूर्ण "निकृष्ट" जीवन की झूठी सुविधा से लाखों गुना महत्वपूर्ण है ।"*
〰️〰️〰️🥀🌹🥀〰️〰️〰️
*॥अखण्डज्योति जून १९७१पृष्ठ२६॥*
*🌸पं.श्रीराम शर्मा आचार्य🌸*
*🌹संस्थापक🌹*
*💐अखिल विश्व गायत्री परिवार💐*
〰️〰️〰️🥀🌹🥀〰️〰️〰️
Comments
Post a Comment