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प्रक्रति और धर्म

 *वृक्षों एवं पौधों का धार्मिक महत्व*


हमारी धर्म संस्कृति में वृक्षों को देवता स्वरूप माना गया है। मनु-स्मृति के अनुसार वृक्ष योनि पूर्व जन्मों के कर्मों के फलस्वरूप मानी गयी है। परमात्मा द्वारा वृक्षों का सर्जन परोपकार एवं जनकल्याण के लिए किया गया है।


(1) तुलसी- तुलसी एक बहुश्रुत, उपयोगी वनस्पति है। स्कन्दपुराण एवं पद्मपुराण के उत्तर खण्ड में आता है कि जिस घर में तुलसी होती है वह घर तीर्थ के समान होता है। समस्त वनस्पतियों में सर्वाधिक धार्मिक,  आरोग्यदायिनी  एवं शोभायुक्त तुलसी भगवान नारायण को अतिप्रिय है। तुलसी माला से मन्त्र जाप अधिक शुभ फलदायी होते है। तुलसी के समीप किया गया अनुष्ठान अत्यन्त पुण्यदायी एव ंसद्गति प्राप्त कराता है।


(2) बिल्वपत्र- शिवपुराण के अनुसार बिल्व पत्र का महत्व इस प्रकार है। एक बिल्व पत्र रोज चढ़ाने से मनुष्य संसार सागर में गोते नहीं खाता, इस संसार में पुण्यात्मा रूप में सुविख्यात होता है। बिल्व पत्र का पौधा पोषित करने वाले को अनन्त पुण्य फल मिलता है। भगवान शंकर के तीर्थ स्थलों पर बिल्वपत्र का पेड़ लगाने की प्राचीन परम्परा है।


(3) केला- केला, विष्णुपूजन के लिये उत्तम मानी गई है। गुरूवार को बृहस्पति पूजन में केल का पूजन अनिवार्य हैं। हल्दी या पीला चन्दन, चने की दाल, गुड़ से पूजा करने पर विद्यार्थियों को विद्या तथा कुँवारी कन्याओं को उत्तम वर की प्राप्ति होती है।


(4) पीपल- पीपल के वृक्ष में अनेकों देवताओं का वास माना गया है। पीपल के मूल भाग में जल, दूध चढ़ाने से पितृ तृप्त होते है तथा शनि शान्ति के लिये भी शाम के समय सरसों के तेल का दिया लगाने का विधान है। शनिश्चरी अमावस्या, सोमवती अमावस्या, हरियाली अमावस्या को पीपल पूजन एवं पीपल के फेरे लिये जाते है। पीपल का वृक्ष लगाने एवं सेवा करने से वंशवृद्धि होती है।


(5) बड़- बड़ वृक्ष की पूजा सौभाग्य प्राप्ति के लिये की जाती है। जिस प्रकार सावित्री ने बड़ की पूजा कर यमराज से अपनी पति के जीवित होने का वरदान मांगा था। उसी प्रकार सौभाग्य वती स्त्रियां अपने पति की लम्बी उम्र की कामना हेतु यह व्रत करके बड़ वृक्ष की पूजा एवं सेवा करती है।


(6) आँवला- आँवले का वृक्ष आरोग्यवर्धक, तेज एवं मेधा प्रदान करने वाला होता है। परिवार की उत्तम स्वास्थ्य की कामना हेतु आँवला नवमी पर इसकी पूजा का विधान है। आँवले के वृक्ष के नीचे ब्राह्मण भोजन कराने तथा दान देने का विशेष फल है।


(7) पलाश- वेदों में पलाश को ब्रह्म वृक्ष कहा गया है। पलाश के प्रति श्रद्धाभाव ऋषियों ने इस प्रकार व्यक्त किया-


ब्रह्मवृक्ष पलाशस्तवं श्रद्धां मेधां च देहि मे।

वृक्षाधिपो नमस्तेस्तु त्वं चात्र सन्निधो भव।।


अर्थात् हे पलाशरूपी ब्रह्मवृक्ष! आप समस्त वृक्षों के राजा है आप मुझे श्रद्धा और मेधा प्रदान करें। आपको मेरा नमस्कार है मैं इस वृक्ष में आपका आव्हान करता हूँ, इसमें आप सन्निहित हो जाये।


कुछ विशेष कामना सिद्धि हेतु कौन से वृक्ष लगाये-


(1) लक्ष्मी प्राप्ति के लिए- तुलसी, आँवला, केला, बिल्वपत्र का वृक्ष लगाये।


(2) आरोग्य प्राप्ति के लिए- ब्राह्मी, पलाश, अर्जुन, आँवला, सूरजमुखी, तुलसी लगाये।


(3) सौभाग्य प्राप्ति हेतु- अशोक, अर्जुन, नारियल, बड़ (वट) का वृक्ष लगाये।


(4) संतान प्राप्ति हेतु- पीपल, नीम, बिल्व, नागकेशर, गुड़हल, अश्वगन्धा को लगाये।


(5) मेधा वृद्धि प्राप्ति हेतु- आँकड़ा, शंखपुष्पी, पलाश, ब्राह्मी, तुलसी लगाये।


(6) सुख प्राप्ति के लिए- नीम, कदम्ब, धनी छायादार वृक्ष लगाये।


(7) आनन्द प्राप्ति के लिए- हरसिंगार (पारिजात) रातरानी, मोगरा, गुलाब लगाये।

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